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शनिवार, 10 नवंबर 2012

बी एच यूं में ''धर्म की अवधारणा और दलित चिंतन '' पर एक दिवसीय गोष्ठी :


         पिछले 08 नवम्बर को राधाकृष्णन  सभागार में दो सत्रों में ''धर्म किअवाधाराना और दलित चिंतन ''पर एकं दिवसीय गोष्ठी सम्पन्न हुई , पहले सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय से आये हुए सूरज कुमार थापा ने  कहा की दलितों की मुक्ति किसी भी धर्म में संभव नहीं है क्योकि धर्म खुद शोषण पर आधारित है इसलिए उन्हें अपनी मुक्ति सबकी मुक्ति में देखना होगा और सांस्कृतिक रूप से वैज्ञानिक चेतना एवं समाजवादी विचारधारा अपनाना  चाहिए . उन्होंने रंगनायकम्मा की पुस्तक ''बुद्ध काफी नहीं,अम्बेडकर भी काफी नहीं , मार्क्स जरूरी है '' का जिक्र किया .
इस सत्र के मुख्य वक्ता  कँवल  भारती   ने वर्तमान व्यवस्था में दलित की उपेक्षा क्रन्तिकारी विचार रखा . कहा की दलित चिंतन ,चिंतन का तीसरा स्कूल है .और आज दलित ,दलित मुद्दे पर ही नहीं वह साम्राज्यवाद ,पूजीवाद ,एवं किसी भी मुद्दे पर बोल सकते है।
अपने अध्यक्षीय व्यक्तव्य में चौथीराम यादव ने कहा कबीर अपने समय में मुल्लाओ एवं पंडितो से जबरदस्त टक्कर ली ,और मेहनतकस जनता से कहा की इनसे दूर रहे।
आखिरी सत्र में मुख्य अतिथि तुलसी राम ने कहा की ऋग्वेद धार्मिक ग्रन्थ न होकर उस समय के सामाजिक जीवन के दस्तावेज है .,जिसमे स्पस्ट तौर पर लिखा है की हम अग्नि की पूजा इसलिय करते है क्योकि वह हमारे दुश्मनों को जलाने का काम करती है , गौतम बुद्ध कैसे अपने तर्कों द्वारा ब्राह्मणवाद की धज्जियाँ उडाई .,उनके वर्ण व्यवस्था पर प्रहार किया इसे बहुत ही रोचक तरीके से बताया ..  अंत में दर्शन विभाग के प्रो . पि0 बागड़े     ने कहा आंबेडकर और मार्क्स को ही साथ लेकर भारत में कोई भी आगामी सामाजिक परिवर्तन का कार्य किया जा सकता है।

जय भीम कामरेड !

-शैलेश कुमार

शनिवार, 15 सितंबर 2012

दबंगई कर बीएचयू ने तुड़वाया अनशन

Tuesday, 11 September 2012 22:06

छात्र संघ बहाली और छात्र सुविधाओं को लागू करने की उठती मांग के मद्देनजर आम छात्रों का भी आंदोलन के प्रति रूझान बढ़ा और संघर्षरत छात्रों को विश्वविद्यालय के व्यापक छात्रों से समर्थन मिला....
जनज्वार. उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में 5 सितंबर से शुरू हुआ छात्रों का आमरण अनशन आज छठे दिन भी जारी है.अनशनकारी करीब डेढ़ दर्जन छात्रों में पांच की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी छात्रों को धमकाकर पुलिस अनशन से उठा दिया है.
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भर्ती छात्रों में भगत सिंह मोर्चा के सचिव रितेश विद्यार्थी, छात्र परिषद् के महासचिव विकास सिंह, विद्यार्थी परिषद् से जुड़े छात्र नेता विपनेंद्र प्रताप सिंह, छात्र सौरभ और अखिलेश शामिल हैं.इस संघर्ष को सत्ताधारी पार्टी की यूवा शाखा समाजवादी युवजन सभा और समाजवादी छात्र सभा ने भी समर्थन दिया है.अस्पताल में भर्ती छात्र नेताओं ने अन्न लेने से मना कर दिया है.
शिक्षक दिवस के दिन 5 सितंबर को सैकड़ों छात्रों के समर्थन के बीच करीब डेढ़ दर्जन छात्रों ने बीएचयू के प्रसिद्ध छात्र संघ भवन के सामने आमरण अनशन शुरू किया.अनशनकारी छात्र नेताओं का कहना था कि जबतक उनकी पंद्रह सूत्री मांगों को वि’वविद्यालय प्रशासन नहीं मानता, तबतक वह अनशन जारी रखेंगे.छात्र संघ बहाली और छात्र सुविधाओं को लागू करने की उठती मांग के मद्देनजर आम छात्रों का भी आंदोलन के प्रति रूझान बढ़ता गया और देखते ही देखते अनशनकारी छात्रों को वि’वविद्यालय के व्यापक छात्रों से समर्थन मिलने लगा.
छात्रों की बढ़ती एकता से घबड़ाये प्रशासन ने छात्रों की मांगे मान लेने की बजाय उन्हें धमकाना शुरू किया.विश्वविद्यालनय प्राक्टर और वीसी की धमकियों के आगे छात्र डटे रहे और अनशन तोड़ने से मना कर दिया.छात्रों के मना करने से खार-खाये विश्वविद्यालय प्रशासन ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे छात्रों को 10 सिंतबर को तड़के 3 बजे उठा लिया.पूलिस वैन में ठूसकर कुछ को हॉस्पिटल ल पहुंचाया तो ज्यादातर छात्रों को धमकाकर चुप रहने की हिदायत दी गयी और अनशन स्थल से छात्रों को खदेड़ दिया गया.सुबह होने पर पुलिसिया उत्पीड़न की यह खबर आम छात्रों तक पहुंची तबतक उनके नेता अस्पताल पहुंचा दिय गये थे.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भगत सिंह छात्र मोर्चा के सचिव रितेश विद्यार्थी ने बताया कि, ‘हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने जो हिंसक व्यवहार किया है वह शांतिप्रिय छात्रों को उकसाने वाला है.हमारा संघर्ष जारी रहेगा, चाहे विश्वविद्यालय जितने हथकंडे अपना ले.’ विश्वविद्यालय के छात्र नेता गौरव कहते हैं, ‘हमारे इस आंदोलन को तीतर-बीतर कर वि’वविद्यालय प्रशासन ने अपनी तानाशाही ही साबित की है.हमारी मांगे पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा.’

 
-शैलेश कुमार 
छात्रों की पूरी मांग जानने के लिए देखें -  बीएचयू में छात्र संघ संघर्ष जोरों पर